मेरा भारत किधर जा रहा है,
मेरा भारत क्यों जा रहा है।
मेरा भारत मुझे रुला रहा है,
मेरा भारत मुझसे दूर जा रहा है।सिस्टम
कर्मजीवी दंडित हो रहा है,
चाटुजीवी इनाम पा रहा है।
शीर्ष के नब्बे बाबू देश चला रहे हैं,
प्रजातंत्र के ढोल की खाल फट रही है।समाज
युवा सोशल मीडिया में खो रहा है,
बेटियाँ दुष्कर्मियों की भेंट चढ़ रही हैं।
बुजुर्ग सम्मान खो रहा है,
दुष्ट सम्मान पा रहा है।मीडिया और शिक्षा
अखबार रद्दी में फेंका जा रहा है,
मीडिया चीख-चीख कर भटका रहा है।
विद्यालय डिग्री बाँट रहे हैं,
ज्ञान को कोई नहीं पूछ रहा है।अंतिम वार
गांधी के “सत्य और अहिंसा” का संदेश खो रहा है,
गोडसे को बहादुर कहा जा रहा है।
पहाड़, नदी, भू की संपदा लुट रही है,
जनता भीख को ही हक मान रही है।मेरा भारत किधर जा रहा है।
मेरा भारत किधर जा रहा है,
मेरा भारत क्यों जा रहा है।
मेरा भारत मुझे रुला रहा है,
मेरा भारत मुझसे दूर जा रहा है।रामभक्त दान दे रहा है,
रामसेवक दान लेकर जा रहा है।
बुद्धिजीवी सो रहा है,
बुद्धूजीवी डरा रहा है।गांधी के “सत्य और अहिंसा” का संदेश खो रहा है,
गोडसे को बहादुर कहा जा रहा है।
मेरा भारत किधर जा रहा है।—“राकेश फीने वाले “
